@सोनू सालवी

आलीराजपुर। जनजातीय कार्य विभाग कार्यालय में करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों, तकनीकी स्वीकृतियों, टेंडरों, भुगतान और अन्य महत्वपूर्ण शासकीय अभिलेख खुले में पड़े मिलने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस संबंध में मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल (रावत) ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को विस्तृत शिकायत पत्र भेजकर स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई और सरकारी रिकॉर्ड की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

शिकायत पत्र में महेश पटेल ने कहा है कि विभाग के महत्वपूर्ण शासकीय अभिलेख सुरक्षित रिकॉर्ड कक्ष में रखे जाने के बजाय खुले स्थान पर पड़े मिले, जिससे रिकॉर्ड की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि इन अभिलेखों के साथ छेड़छाड़, उन्हें गायब करने या नष्ट करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि मामला मीडिया में आने के बाद संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा दस्तावेजों को तत्काल हटाने का प्रयास किया गया।

मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि मामले की जांच स्वतंत्र उच्चस्तरीय समिति, विशेष जांच दल (SIT) अथवा किसी सक्षम राज्य स्तरीय एजेंसी से कराई जाए। साथ ही सभी अभिलेखों का भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) कराया जाए तथा जांच पूरी होने तक किसी भी रिकॉर्ड को हटाने, नष्ट करने या उसमें छेड़छाड़ पर रोक लगाई जाए।इसके अलावा सहायक आयुक्त, रिकॉर्ड शाखा और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर जिम्मेदारी तय करने तथा रिकॉर्ड से छेड़छाड़ या उसे नष्ट किए जाने की पुष्टि होने पर विभागीय कार्रवाई के साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) एवं अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की गई है। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग भी पत्र में की गई है।
महेश पटेल ने शिकायत पत्र में प्रशासन से 15 सवाल भी पूछे हैं। इनमें प्रमुख रूप से यह पूछा गया है कि करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों, टेंडरों और वित्तीय स्वीकृतियों से जुड़े दस्तावेज खुले में कैसे पहुंचे, इसके लिए जिम्मेदार कौन है, रिकॉर्ड रूम होने के बावजूद अभिलेख बाहर क्यों पड़े मिले और क्या इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी।उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि खुले में मिले दस्तावेजों में क्या वित्तीय और निर्माण कार्यों से जुड़े संवेदनशील रिकॉर्ड शामिल थे, पिछले पांच वर्षों में विभाग ने कितने अभिलेख नष्ट किए, क्या वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया तथा यदि कोई रिकॉर्ड गायब पाया जाता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। साथ ही पूरे प्रदेश के जनजातीय कार्य विभाग कार्यालयों में रिकॉर्ड प्रबंधन का विशेष ऑडिट कराने की मांग भी उठाई गई है।
महेश पटेल ने बताया कि शिकायत पत्र की प्रतिलिपि जनजातीय कार्य मंत्री, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव जनजातीय कार्य विभाग, आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग, संभागायुक्त इंदौर, आयुक्त राजस्व विभाग, कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक आलीराजपुर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी गई है। उन्होंने कहा कि सरकारी अभिलेख जनता की अमूल्य धरोहर हैं। इनके संरक्षण में किसी भी प्रकार की लापरवाही प्रशासनिक पारदर्शिता और जनता के विश्वास पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष, समयबद्ध और पारदर्शी जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।



