इंदौर। खाकी वर्दी का नाम सुनते ही आमतौर पर लोगों के मन में डर की भावना आती है, लेकिन इंदौर में एक पुलिसकर्मी ने इस सोच को बदलने का काम किया है। धार जिले के ग्राम अतरसुमा (डही) निवासी भूपेंद्र बामनिया, जो वर्तमान में पुलिस विभाग में पदस्थ हैं, समाजसेवा के क्षेत्र में एक नई मिसाल बन रहे हैं।

भूपेंद्र बामनिया द्वारा स्थापित सुमन फाउंडेशन के सहयोग से संचालित शिखर एकेडमी, इंदौर के निःशुल्क ऑनलाइन शिक्षा अभियान ने वर्ष 2026 में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इस वर्ष 100 से अधिक बच्चों का चयन नवोदय विद्यालय, सैनिक स्कूल, एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय और कन्या शिक्षा परिसर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में हुआ है। खास बात यह है कि इनमें अधिकांश बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर, वंचित एवं आदिवासी परिवारों से हैं।

आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2024 में 30 से अधिक, 2025 में 85 से अधिक और 2026 में 100 से ज्यादा बच्चों की सफलता इस अभियान की लगातार प्रगति को दर्शाती है।इस उपलब्धि के पीछे एक समर्पित टीम का योगदान है, जिसमें अनिल रावत, विकास सोलंकी, गणेश, करण बामनिया, जितेंद्र बामनिया, मुकेश बामनिया, शुभम जमरा, जगप्रीत टुटेजा और देवेंद्र सिंह चुंडावत शामिल हैं।

टीम गांव-गांव जाकर बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक कर रही है, अध्ययन सामग्री उपलब्ध करा रही है और नियमित मार्गदर्शन भी दे रही है।वर्ष 2024 में शुरू हुए इस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को मजबूत आधार देने में अलीराजपुर जिले के जोबट तहसील के ग्राम कदवाल निवासी अनिल रावत का विशेष योगदान रहा है, जिन्होंने अपनी पढ़ाई के साथ इस मिशन को आगे बढ़ाया।तकनीकी रूप से भी यह पहल आगे बढ़ रही है।

अब एआई आधारित शिक्षा, डिजिटल क्लास और ऑनलाइन टेस्ट जैसी सुविधाएं जोड़ी गई हैं, जिससे ग्रामीण बच्चों को भी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी का अवसर मिल रहा है।

यह अभियान “35 मिशन” के तहत संचालित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य शून्य से शुरुआत कर बच्चों को शिक्षा के माध्यम से शिखर तक पहुंचाना है। इस मिशन को सुमन फाउंडेशन का मजबूत सहयोग मिल रहा है, जो वर्ष 2021 से शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय है। साथ ही शहीद उधम सिंह सेवा संवेदना समिति भी रक्तदान, पर्यावरण संरक्षण और जनजागरूकता के माध्यम से इस पहल को मजबूती दे रही है।

भूपेंद्र बामनिया का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल बच्चों का चयन कराना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सक्षम बनाना है। वहीं अनिल रावत के अनुसार, शुरुआत में शिक्षा के प्रति जागरूकता लाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन अब गांव-गांव में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।

टीम ने वर्ष 2027 के लिए 200 से अधिक बच्चों के चयन का लक्ष्य रखा है। इसके तहत अनाथ एवं अत्यंत गरीब बच्चों के लिए इंदौर में निःशुल्क आवास, भोजन और शिक्षा की व्यवस्था करने की योजना भी तैयार की जा रही है।

वर्तमान में 200 से अधिक बच्चे इस निःशुल्क शिक्षा अभियान से जुड़े हैं और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। शिखर एकेडमी अब पश्चिमी मध्यप्रदेश सहित आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा की प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी है।

शिक्षा के साथ-साथ भूपेंद्र बामनिया “भीमा नायक रक्त समूह” के माध्यम से रक्तदान महाअभियान भी चला रहे हैं, जिससे जरूरतमंदों को समय पर निःशुल्क रक्त उपलब्ध कराया जा रहा है।

कुल मिलाकर, यह पहल केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की एक मजबूत शुरुआत है, जो वंचित बच्चों के सपनों को नई उड़ान दे रही है।

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